काश नए साल में इनमे कमी हो पाए
नेताओ के अहंकार में
राजनैतिक गुंडागर्दी में
सरकारी भ्रस्टाचार में
पुलिस के अत्याचार में
शारीर के व्यापार में
अन्याय की भरमार में
परशासन की तानाशाही में
पुलिस की लापरवाही में
खापों की तालिबानी में
सत्ता के गंदे खेल में
लाठी की ताकत में
नखरे और हिमाकत में
शादी की फिजूलखर्ची में
मुछो की झूठी श्यान में ————–