आयातित गेहूं क़ि खरीद के लिए सरकार ने बड़े व्यापारियों को १२-१४ रुपये दिए जबकि किसान को मात्र ९.५० रूपये दिए |महंगे आयात के बावजूद राशन क़ि दुकानों में सप्लाई के वितरण में कटोती लगातार जारी है | खुले बाजार में गेहूं क़ि कीमतों में बढ़ोतरी जारी है |क्या खेल है यह ? इससे किसको फायदा हो रहा है ? ना ही तो किसान को और ना ही उपभोगता को बल्कि इसका फायदा बड़ी कम्पनियों को मिल रहा है | आप कया कहते है इस बारे में ? यही कहानी चीनी के साथ है |दो साल पहले किसानों ने जब गन्ने क़ि बहुत अछी फसल पैदा क़ि तो उन्हें उनके उत्पादन क़ि कीमत के हिसाब से उची मूल्य ना देकर उनको दण्डित किया गया | इससे किसको फायदा मिला ?बड़ी चीनी कम्पनियों ने इससे बहुत मुनाफा कमाया | ३३ कम्पनियों ने मात्र एक साल में अपना मुनाफा ३३ करोड़ से बढाकर ९०० करोड़ कर लिया जो २९०० प्रतिशत होता है | किसान तो इससे प्रभावित हुआ ही इसके साथ ही उपभोगताओं को भी चीनी ४० रूपये किलो खरीदनी पड़ी | आम आदमी के साथ है कांग्रेस का हाथ का नारा देकर ई सरकार अमीरों के साथ खरी हुई दिखाई देती है | चंद दिनों में ही आम आदमी वाले खास आदमियों के पाले में खड़े दिखाई दिए | वायदा व्यापार के दायरे में खाद्य पदार्थों को शामिल करने क़ि इजाजत देना यह सरकार क़ि अन्य निति रही जिसने महंगाई को बेहताशा बढ़ावा दिया| जरूरी खाद्य पदार्थों के लिए मुनाफाखोरी क़ि इजाजत क्यों दी गयी ? वायदा कारोबार के लिए गिहू पर जो प्रतिबंध लगाया था उसे भी केंद्र सरकार ने हटा लिया | प्राइवेट कम्पनियों ने इसमें खूब मुनाफा कमाया | तुरत प्रभाव से वायदा कारोबार पर रोक लगाई जानी चाहिए | लाखों लोगों को राशन कार्ड से वंचित कर दिया गया तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को असल में ख़तम कर दिया गया है |ग्रामीण भारत में एक व्यस्क व्यक्ति के लिए गरीबी रेखा क़ि ११ रूपये प्रतिदिन क़ि बोगाश परिभाषा का परिणाम यह हुआ क़ि गरीबों क़ि बड़ी संख्या को बी पी एल कार्ड नहीं मिले और बाकि गरीबों को कहा गया क़ि वे गरीबी क़ि रेखा से ऊपर हैं |एक आदमी या औरत जिसकी कमी १५ रुपये प्रतिदिन है कया वाह गरीब नहीं है ? उन्हें बी पी एल कार्ड क्यों नहीं मिले? पिछले ५ सालों में राशन प्रणाली के लिए विभिन्न प्रदेशों को जाने वाले चावल और गिहूँ में ७५ प्रतिशत क़ि कटौती केन्द्रीय सरकार के द्वारा क़ि गई है | सभी असंगठित मजदूरों को बी पी एल कार्ड मिलने चाहियें |