मनुष्य को जाति,धर्म,गोत्र,आदि के प्रतीक के रूप में देखना नागरिक भावना के खिलाफ है | यह अवैज्ञानिक भी है| वैज्ञानिक दृष्टि का अर्थ है सामाजिक-सांस्कृतिक परिघटनाओं को ऐतिहासिक सन्दर्भों में देखना और उनके विकासशील चरित्र को पहचानना |नागरिक का अर्थ है ऐसा इंसान जिसमें आत्म चेतना हो ,जो समाज के साथ सक्रिय संम्बंध बनाये [...]
कडुआ सच
मेरे दादा जी की शादी मेरी दादी से कर दी गयी
उनकी कोई देखा दाखि नहीं थी बस पडदादा गए
शादी पक्की करके ही लोटे थे और एक दिन सात
फेरे दिवा दिए और घर बस गया २० प्रतिशत भी
हमारे दादा दादी की रुचियाँ एक जैसी नहीं थी
बहुत बार लड़ते देखा उनको प्यार की बातें तो
करते [...]
स्थानीयता और विश्वदृष्टि
सभी लोगों को भागीदारी के मौके मिल सकें और हम मौजूदा वैश्वीकरण या नवउपनिवेशवाद से लड़ सकें | इसके लिए जरूरी है क़ि स्थानीयता को महत्व दिया जाये और वहां के संघर्षों को साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष से जोड़ा जाये |शहरी इलाकों के इलावा गाँव को बुनियादी इकाई के रूप में रेखांकित करना जरूरी [...]
कहीं भी सही काम नहीं पाता हूँ मैं
सर पकड़ कर बैठ जाता हूँ मैं
सोचता हूँ कोई आकर मुझे उठाये———
काले काम काले धंधे बुला रहे हैं
इनमे कई लोग बेंतहा कमा रहे हैं
मुझे भी यही रास्ता दिखा रहे हैं
डर लगता है मुझको कोई ढाढस बंधवाये ——
मेरे जैसे बहुत काले अंधेरो में खो गए
गलत [...]
मैंने देखा है अपने माँ बाप को लड़ते हुए
रोजाना इस या उस बात पर झगड़ते हुए
माँ कहती पापा को क्यों पड़ौसिन को तकते
माँ को पीटते हाथ कभी नहीं उनके थकते
बच्चे बड़े हो रहे इसका उनको ख्याल नहीं
क्या असर पड़ रहा इसका उनको मलाल नहीं
बचपन था हमें ज्यादा चीजों का पता न था
तरुनाई की उमर [...]
मियां बीबी रहगे ऐकले तीनो बालक लेगे उडारी देखो|
के के सपने संजोये थे जिब हुई ये संतान म्हारी देखो |
बचपन उनका सही बीते करे दीन रात काले हमनै
क्याहें की परवाह करी ना बहा पसीना पाले हमनै
पढ़न खंदाये लाड लड़ाए तनखा खर्ची सारी देखो|
कदे रुसजया कदे कुबध करै [...]
छदम इतिहास का सहारा लिया जा रहा है
छदम विज्ञानं को स्थापित किया जा रहा है
तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा भरपूर
देवी शक्तियों की फैंटेसी हमें दिखायेंगे जरूर
भूत प्रेत आत्मा और आधार शैतान बनाया
अंध विश्वास असंगति को यहाँ खूब बढाया
सेक्स हिंसा नशे का पैकेज पूरा थमा दिया
लड़कों लड़कियों को गलत रास्ता दिखा दिया
गफलत में नहीं [...]
जीने के सभी आयाम बदल गए
गाँव के जामुन आम बदल गए
चोटी हमारी साथ छोड़ गयी आज
घाघरा भी हुआ है हमसे नाराज
कुँए और देखो तालाब बदल गए
कई सवालों के जवाब बदल गए
पुराने और नए की जंग जारी है
आज बुजुर्गों का कल तो हमारी है
ये अनगिनत हाथ ये दिमाग
भारत की तस्वीर बदल सकते
हमने इन्हें भीड़ बना दिया
हिस्साब तो मांगेगी यह भीड़
रखना पूरा हिस्साब लीख कर
सत्ते, नफे,फत्ते ,सरिता ,कविता,सविता अर धापा ताई शनिचर नै फेर कठ्ठे होगे अर आपस मैं बतलाये |सत्ते बोल्या- गोतां के नाम पर रोज अखबारां मैं किमे ना किमे आया रहवै सै |मानस जात गोत मैं बाँट कै गेर दिए |हरयाणवी,भारतीय ,मानवता ,इंसानियत ये हर्फ़ ही गायब होगे अखबारां [...]