के जुलम करया इसा मेरे नहीं बात समझ मैं आयी
प्यार करया सोहनदास तै नहीं खोदी सै कोए खाई
छोरा छोरी बरोबर हों हम कोए भेद नहीं करते
छोरी नै पूरी आजादी सै देखे रोजाना दम भरते
आज के होग्या सबकै क्यों कलंकनी सबनै बताई ||
संस्कृति कै बट्टा लाया इल्जाम मेरे ऊपर लगाते
प्यार करना गलत बेटी सारे [...]
तीन बात बूझ्नी चाहूं सूँ आज मैं विद्वानां तै
सिस्टम इसा कोनसा जो दे सम्मान किसाना तै
छोटूराम नै कर्जे करके माफ़ नाम कमाया
चालीस साल बाद कर्जा हटके सर पै छाया
चक्रव्यूह कैसे टूटै मैं बुझुं सूँ कदरदानां तै
कैमिकल खाद नै खेती जमा पढ़न बिठाई सै
और के तरीका हो मेरी समझ नहीं आयी सै
कयूं धरती [...]
भगतसिंह हाँ भरले नै , चाहवां तूं ब्याह करले नै
बात कानां पर धरले नै , बिना ब्याह के रहना हो
दो दो विधवा घर मैं शहादत दी चाचा ताऊ नै
तीजी विधवा सोच कांपू नहीं कुछ समझ पाऊँ मैं
देने मैं खुलकै क़ुरबानी,शादी करवादे आनाकानी
शादी नहीं करने की ठानी ,ना तो पड़ी दुःख सहना [...]
पहले ज़माने में शादी से पहले लड़का देखने के लिए और सगाई के लिए नाई जाता था | वह जो फ़ाइनल कर देता था वह पत्थर की लकीर थी | यह महान परंपरा थी हमारी | तीन तीन दिन की बारात होती थी | गाँव में बारात चार पाँच जगह रूकती थी [...]
मैं एक साधारण जाट परिवार में पली लड़की
अपने जीवन को सार्थक बनाने को चली लड़की
अनगिनत सहन क़ि हैं जीवन क़ि ये कठिनाई
गाँव के ही जाट लड़कों ने इज्जत लूटनी चाही
खेतों में काम करते कुछ दलित ये दौड़े आये
तभी मेरे परसे जुलम के काले बादल छंट पाए
कालेज जाने लगी तो भी मेरा पीछा [...]
सविता क़ि शादी को चार साल हो गए हैं कोई बच्चा नही हुआ | परिवार बहुत परेशान| करतार सिंह क़ि दूसरी शादी क़ि तयारी हो जाती हैं | सविता अपनी छोटी बहन का रिश्ता करवाने के बारे अपनी माँ से बात करती है | ज्ञान विज्ञानं का एक डाक्टर एक दिन गाँव आता है [...]
Rai_Ka_Pahad