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	<title>Comments for Secular Haryana</title>
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	<description>Live and Let Live</description>
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		<item>
		<title>Comment on JAJBAT by R.S.Dahiya</title>
		<link>http://secularharyana.com/2010/06/26/jajbat/comment-page-1/#comment-505</link>
		<dc:creator>R.S.Dahiya</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jun 2010 15:47:16 +0000</pubDate>
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		<description>किसी पर भी तूं एतबार न कर 
भावुकता में बर्बाद घरबार न कर 
बात हैं  बात का भरोसा क्या है 
जाँ किसी पर निस्सार न कर 
अमीर क़ि नजरें जाँ लेलेंगी 
इनसे कभी कोई करार न कर 
बेवफा से वफ़ा नहीं होती है 
जाने दे दिल को बेक़रार न कर 
अमीर गरीब क़ि दुनिया है यह 
झूठे वायदे हैं स्वीकार न कर 
रणबीर एक दिन टूट जायेगा 
ख्वाब है ख्वाब से प्यार न कर</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>किसी पर भी तूं एतबार न कर<br />
भावुकता में बर्बाद घरबार न कर<br />
बात हैं  बात का भरोसा क्या है<br />
जाँ किसी पर निस्सार न कर<br />
अमीर क़ि नजरें जाँ लेलेंगी<br />
इनसे कभी कोई करार न कर<br />
बेवफा से वफ़ा नहीं होती है<br />
जाने दे दिल को बेक़रार न कर<br />
अमीर गरीब क़ि दुनिया है यह<br />
झूठे वायदे हैं स्वीकार न कर<br />
रणबीर एक दिन टूट जायेगा<br />
ख्वाब है ख्वाब से प्यार न कर</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on JAJBAT by R.S.Dahiya</title>
		<link>http://secularharyana.com/2010/06/26/jajbat/comment-page-1/#comment-504</link>
		<dc:creator>R.S.Dahiya</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jun 2010 15:46:06 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://secularharyana.com/?p=1232#comment-504</guid>
		<description>इस बेवफा सिस्टम से वफ़ा मांग रहे हैं 
हमें क्या मालूम है हम खाता मांग रहे हैं 
ये कीस्मत का खेल रचाया है इसी ने तो 
इसी से हम कीस्मत क़ि दुआ  मांग रहे हैं
पूरा सच छिपा ये अध सच बताते हमको 
जहर घोला उसीसे साफ हवा मांग रहे है 
रोजाना जो खेलता हमारे जज्बात के साथ 
सुख क़ि राही का उससे पाता मांग रहे हैं 
सुरग क़ि कामना में छिपी हुयी रणबीर
अपने खुद क़ि ही हम चिता मांग रहे हैं</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस बेवफा सिस्टम से वफ़ा मांग रहे हैं<br />
हमें क्या मालूम है हम खाता मांग रहे हैं<br />
ये कीस्मत का खेल रचाया है इसी ने तो<br />
इसी से हम कीस्मत क़ि दुआ  मांग रहे हैं<br />
पूरा सच छिपा ये अध सच बताते हमको<br />
जहर घोला उसीसे साफ हवा मांग रहे है<br />
रोजाना जो खेलता हमारे जज्बात के साथ<br />
सुख क़ि राही का उससे पाता मांग रहे हैं<br />
सुरग क़ि कामना में छिपी हुयी रणबीर<br />
अपने खुद क़ि ही हम चिता मांग रहे हैं</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on JAJBAT by R.S.Dahiya</title>
		<link>http://secularharyana.com/2010/06/26/jajbat/comment-page-1/#comment-503</link>
		<dc:creator>R.S.Dahiya</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jun 2010 15:44:21 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://secularharyana.com/?p=1232#comment-503</guid>
		<description>आज तो यह क्रियेटिविटी का जमाना है 
नया करके दिखाओ जो आगे जाना है 
प्रतिभा दिखानी है हमें अपनी तो ये 
&#039;किस&#039; भी नए ढंग से  करके दिखाना है 
&#039;किस&#039; करते हुए भी तुमको अपना ये 
फोटो सही अंदाज में ही खिंचवाना है 
&#039;किस &#039; में भी कितना मजा आया ये 
&#039;खास&#039; शब्दों में ये सबको  बतलाना है
स्विम वियर  पहन कर चलना होगा 
स्विम करके भी  फिर  दिखलाना है 
शरीर का अंग अंग पूरा मटका कर 
अपनी क्रियेटिविटी को बाहार लाना है</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आज तो यह क्रियेटिविटी का जमाना है<br />
नया करके दिखाओ जो आगे जाना है<br />
प्रतिभा दिखानी है हमें अपनी तो ये<br />
&#8216;किस&#8217; भी नए ढंग से  करके दिखाना है<br />
&#8216;किस&#8217; करते हुए भी तुमको अपना ये<br />
फोटो सही अंदाज में ही खिंचवाना है<br />
&#8216;किस &#8216; में भी कितना मजा आया ये<br />
&#8216;खास&#8217; शब्दों में ये सबको  बतलाना है<br />
स्विम वियर  पहन कर चलना होगा<br />
स्विम करके भी  फिर  दिखलाना है<br />
शरीर का अंग अंग पूरा मटका कर<br />
अपनी क्रियेटिविटी को बाहार लाना है</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on JAJBAT by R.S.Dahiya</title>
		<link>http://secularharyana.com/2010/06/26/jajbat/comment-page-1/#comment-502</link>
		<dc:creator>R.S.Dahiya</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jun 2010 15:43:09 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://secularharyana.com/?p=1232#comment-502</guid>
		<description>छबके ना मारने आते  तो आज तूं कामयाब नहीं 
बिना सिफारिश कड़े   नौकरी पूरा होवै ख्वाब नहीं 
छल कपट बिना मानस का होवै आज गुजारा ना 
काले धन तै बड्डा यो अफसर नेता का सहारा ना
भित्तर काला बाहार सफ़ेद यो मुखोटा पहन लिया 
जिसका भित्तर सै सफ़ेद बहोत कहर सहन किया 
सब कुछ बहगया आज किसपे  कोण यकिन करै  
थोड़े घने बचे उनको यो सिस्टम ग़मगीन करै 
बिना संघर्ष नहीं गुजारा रणबीर यो जान  लियो 
मानवता एक दिन जीतै बात इतनी मान लियो</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>छबके ना मारने आते  तो आज तूं कामयाब नहीं<br />
बिना सिफारिश कड़े   नौकरी पूरा होवै ख्वाब नहीं<br />
छल कपट बिना मानस का होवै आज गुजारा ना<br />
काले धन तै बड्डा यो अफसर नेता का सहारा ना<br />
भित्तर काला बाहार सफ़ेद यो मुखोटा पहन लिया<br />
जिसका भित्तर सै सफ़ेद बहोत कहर सहन किया<br />
सब कुछ बहगया आज किसपे  कोण यकिन करै<br />
थोड़े घने बचे उनको यो सिस्टम ग़मगीन करै<br />
बिना संघर्ष नहीं गुजारा रणबीर यो जान  लियो<br />
मानवता एक दिन जीतै बात इतनी मान लियो</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on JAJBAT by R.S.Dahiya</title>
		<link>http://secularharyana.com/2010/06/26/jajbat/comment-page-1/#comment-501</link>
		<dc:creator>R.S.Dahiya</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jun 2010 15:41:22 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://secularharyana.com/?p=1232#comment-501</guid>
		<description>पैसा छाया चारों और आज के संसार में 
रिश्तेनाते टूट रहे हैं आज के परिवार में 
भाई का भाई दुश्मन जहाँ में बना हुआ है 
खापों का फ़तवा चारों तरफ तना हुआ है 
 नैतिकता  मानवता चीजें विरली हो गयी 
सादगी सच्चाई जाने कहाँ सब ये खो गयी 
सब कुछ तो बिक रहा आज इस बाजार में
भ्रष्ट  नेता छाये  देखो आज के इस  दरबार  में 
सिस्टम हमारा ये बिल्कुल खोखला हो रहा 
अविश्वास के बीज यह हर जगह बो रहा  
विषमता के हैं  हर तरफ ये  अम्बर लगे 
खाई बढती जा रही हर रिश्ता बेकार लगे 
किसान कर्ज में डूबा फांसी खाने को मजबूर 
निठल्ला ऐश करता ये सिस्टम का दस्तूर</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पैसा छाया चारों और आज के संसार में<br />
रिश्तेनाते टूट रहे हैं आज के परिवार में<br />
भाई का भाई दुश्मन जहाँ में बना हुआ है<br />
खापों का फ़तवा चारों तरफ तना हुआ है<br />
 नैतिकता  मानवता चीजें विरली हो गयी<br />
सादगी सच्चाई जाने कहाँ सब ये खो गयी<br />
सब कुछ तो बिक रहा आज इस बाजार में<br />
भ्रष्ट  नेता छाये  देखो आज के इस  दरबार  में<br />
सिस्टम हमारा ये बिल्कुल खोखला हो रहा<br />
अविश्वास के बीज यह हर जगह बो रहा<br />
विषमता के हैं  हर तरफ ये  अम्बर लगे<br />
खाई बढती जा रही हर रिश्ता बेकार लगे<br />
किसान कर्ज में डूबा फांसी खाने को मजबूर<br />
निठल्ला ऐश करता ये सिस्टम का दस्तूर</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on NAVJAGRAN by R.S.Dahiya</title>
		<link>http://secularharyana.com/2010/06/26/navjagran/comment-page-1/#comment-500</link>
		<dc:creator>R.S.Dahiya</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jun 2010 15:30:22 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://secularharyana.com/?p=1230#comment-500</guid>
		<description>फोर लेन और मॉल  म्हारा  चेहरा खूब चमकाया रै
लिंग अनुपात अनीमिया नै महारै  कालस लगायारै 
दो छोर म्हारे हरयाने के नहीं मेरी समझ मैं आवें
एक कान्ही सबते बाढ़ कार हरियानावासी बनावें
महिला भ्रूण हत्या करके सबते तेज कार चलावें
गर्भ वती महिला खून कमी जापे के माह मरजयावें
सोच सोच इन बातां नै दिमाग मेरा चकराया रै&#124;
&#124;आर्थिक विकास घना सामाजिक विकास थोडा बताते
विकास मॉडल मै मोजूद कमी नहीं खोल कै दिखाते
सचाई नै आंकड़ो बीच कई बुद्धिजीवी बी छिपाते
म्हारे नेता बी सचाई तै बहोत घना आज घबराते
पांचो घी मैं जिसकी सें हरियाणा नंबर वन भाया रै&#124;
आर्थिक विकास की माया देखो पैसा  छाया चारो और
नंबर वन हरियाणा का मचाया चारो कान्ही शोर
धरती बिकती जा म्हारी औरो के बिक़े डांगर ढोर
शाह नै मात देवें ये समाज सेवी बनके ठग चोर
चोर दवारा साह खुले के मैं जाता रोजाना धमकाया रै&#124;
कई बार  सोचूँ लोट खाट मैं आज हुआ किसा विकास यो
दिमाग भन्नाया सै मेरा सोचै कदे होरया हो विनास यो
ठेकेदारी का बोलबाला सै करता  म्हारा उपहास यो
विकास हुआ या विनास हिल गया मेरा विश्वास यो
रणबीर बरोने वाला ना इनकी बहका मैं आया रै &#124;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>फोर लेन और मॉल  म्हारा  चेहरा खूब चमकाया रै<br />
लिंग अनुपात अनीमिया नै महारै  कालस लगायारै<br />
दो छोर म्हारे हरयाने के नहीं मेरी समझ मैं आवें<br />
एक कान्ही सबते बाढ़ कार हरियानावासी बनावें<br />
महिला भ्रूण हत्या करके सबते तेज कार चलावें<br />
गर्भ वती महिला खून कमी जापे के माह मरजयावें<br />
सोच सोच इन बातां नै दिमाग मेरा चकराया रै|<br />
|आर्थिक विकास घना सामाजिक विकास थोडा बताते<br />
विकास मॉडल मै मोजूद कमी नहीं खोल कै दिखाते<br />
सचाई नै आंकड़ो बीच कई बुद्धिजीवी बी छिपाते<br />
म्हारे नेता बी सचाई तै बहोत घना आज घबराते<br />
पांचो घी मैं जिसकी सें हरियाणा नंबर वन भाया रै|<br />
आर्थिक विकास की माया देखो पैसा  छाया चारो और<br />
नंबर वन हरियाणा का मचाया चारो कान्ही शोर<br />
धरती बिकती जा म्हारी औरो के बिक़े डांगर ढोर<br />
शाह नै मात देवें ये समाज सेवी बनके ठग चोर<br />
चोर दवारा साह खुले के मैं जाता रोजाना धमकाया रै|<br />
कई बार  सोचूँ लोट खाट मैं आज हुआ किसा विकास यो<br />
दिमाग भन्नाया सै मेरा सोचै कदे होरया हो विनास यो<br />
ठेकेदारी का बोलबाला सै करता  म्हारा उपहास यो<br />
विकास हुआ या विनास हिल गया मेरा विश्वास यो<br />
रणबीर बरोने वाला ना इनकी बहका मैं आया रै |</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on NAVJAGRAN by R.S.Dahiya</title>
		<link>http://secularharyana.com/2010/06/26/navjagran/comment-page-1/#comment-499</link>
		<dc:creator>R.S.Dahiya</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jun 2010 15:29:30 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://secularharyana.com/?p=1230#comment-499</guid>
		<description>दारू का नशा भी सामने वाले की हैसियत के हिस्साब से चढ़ता है 
१.पत्नी के सामने एक तरह से 
२. अपने से ताकतवर के सामने एक तरह से
३. अपने से कमजोर के सामने एक तरह से 
४. एकला है तो एक तरह से</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>दारू का नशा भी सामने वाले की हैसियत के हिस्साब से चढ़ता है<br />
१.पत्नी के सामने एक तरह से<br />
२. अपने से ताकतवर के सामने एक तरह से<br />
३. अपने से कमजोर के सामने एक तरह से<br />
४. एकला है तो एक तरह से</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on NAVJAGRAN by R.S.Dahiya</title>
		<link>http://secularharyana.com/2010/06/26/navjagran/comment-page-1/#comment-498</link>
		<dc:creator>R.S.Dahiya</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jun 2010 15:28:43 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://secularharyana.com/?p=1230#comment-498</guid>
		<description>प्रेम करने वालों को दुनिया आज भी याद करती है / मारने वालों को कौन याद करता है /
कुछ तो कहें 
कातिल सिर पे खड़े हैं</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>प्रेम करने वालों को दुनिया आज भी याद करती है / मारने वालों को कौन याद करता है /<br />
कुछ तो कहें<br />
कातिल सिर पे खड़े हैं</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on NAVJAGRAN by R.S.Dahiya</title>
		<link>http://secularharyana.com/2010/06/26/navjagran/comment-page-1/#comment-497</link>
		<dc:creator>R.S.Dahiya</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jun 2010 15:27:42 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://secularharyana.com/?p=1230#comment-497</guid>
		<description>पूरा यकिन है क़ि ये प्यार के दुश्मन हारेंगे 
अभी ये और भी कई जोड़ों को यूंही मारेंगे
दुनिया  करवट बदलेगी  थोडा तो सबर करो 
इन जोड़ों को हीरो एक दिन हम ही पुकारेंगे</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पूरा यकिन है क़ि ये प्यार के दुश्मन हारेंगे<br />
अभी ये और भी कई जोड़ों को यूंही मारेंगे<br />
दुनिया  करवट बदलेगी  थोडा तो सबर करो<br />
इन जोड़ों को हीरो एक दिन हम ही पुकारेंगे</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>Comment on NAVJAGRAN by R.S.Dahiya</title>
		<link>http://secularharyana.com/2010/06/26/navjagran/comment-page-1/#comment-496</link>
		<dc:creator>R.S.Dahiya</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Jun 2010 15:26:41 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://secularharyana.com/?p=1230#comment-496</guid>
		<description>नौवीं जमात के किसी एक लडके ने 
आठवीं जमात क़ि एक लड़की को 
एक प्रेम पत्र लिखा और दिया 
टीचर को भनक सी लग गयी 
लड़के को  किसी ने कुछ न कहा 
लड़की का जीना मुश्किल कर दिया 
उमर का तकाजा है इसे समझें 
और फिर इस उमर के बच्चों को 
हम सब समझाएं समाज क़ि है 
एक बहूत जरूरी जिम्मेवारी 
इसको ठीक यदि नहीं समझा तो 
समाज एक भयानक दुर्घटना का 
शिकार होने जा रहा है यह तो शायद 
हम सब क़ि समझ आ ही गया है</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>नौवीं जमात के किसी एक लडके ने<br />
आठवीं जमात क़ि एक लड़की को<br />
एक प्रेम पत्र लिखा और दिया<br />
टीचर को भनक सी लग गयी<br />
लड़के को  किसी ने कुछ न कहा<br />
लड़की का जीना मुश्किल कर दिया<br />
उमर का तकाजा है इसे समझें<br />
और फिर इस उमर के बच्चों को<br />
हम सब समझाएं समाज क़ि है<br />
एक बहूत जरूरी जिम्मेवारी<br />
इसको ठीक यदि नहीं समझा तो<br />
समाज एक भयानक दुर्घटना का<br />
शिकार होने जा रहा है यह तो शायद<br />
हम सब क़ि समझ आ ही गया है</p>
]]></content:encoded>
	</item>
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